चुनाव हारे प्रशांत किशोर ने फिर मोर्चा संभाला, और केजरीवाल दिल्ली छोड़े हुए हैं।

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दिल्ली की हार के बाद अरविंद केजरीवाल अब तक अपने दिल्लीवालों के बीच नहीं लौटे हैं, जबकि प्रशांत किशोर फिर से बिहार यात्रा पर निकल पड़े हैं. क्या इसलिए क्योंकि प्रशांत किशोर के पास को कोई राजनीतिक ऑपश्न नहीं है, और केजरीवाल के पास पंजाब से लेकर गोवा और गुजरात तक विकल्प ही विकल्प हैं.
प्रशांत किशोर जब बिहार चुनाव की तैयारी कर रहे थे, तब कई बार उनकी तुलना अरविंद केजरीवाल से की जा रही थी. दरअसल, दोनों में कई बातें कॉमन भी हैं जो चुनाव के दौरान भी अक्सर महसूस की जाती थीं – और एक बार फिर ऐसा संयोग बना है, लेकिन उसमें प्रयोग की गुंजाइश कम लग रही है.
प्रशांत किशोर ने 8 फरवरी से बिहार नवनिर्माण यात्रा शुरू की है. बिहार यात्रा की घोषणा प्रशांत किशोर ने पहले ही कर डाली थी. ठीक एक साल पहले 8 फरवरी, 2025 को ही दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे, जब अरविंद केजरीवाल बीजेपी के हाथों सत्ता गंवा बैठे. और, 2025 के आखिर में हुए बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर के हाथ कुछ भी नहीं लगा. 
जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल में एकबारगी एक बड़ा फर्क नजर आता है. अरविंद केजरीवाल को जहां दिल्ली से दूर हुए एक साल हो गए, प्रशांत किशोर कुछ ही दिनों में काम पर लग गए हैं – हालांकि, आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि अरविंद तो दिल्ली से कभी दूर हुए ही नहीं, बल्कि हार के तत्काल बाद वो बाउंसबैक करने की तैयारियों में जुट गए थे. 
यात्रा को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर?  प्रशांत किशोर ने बिहार में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत यात्रा से ही की थी. और, एक बार फिर वो यात्रा पर ही निकले हैं. पहली यात्रा के बाद प्रशांत किशोर बिहार में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रहे थे. सत्ता परिवर्तन तो नहीं हुआ, लेकिन सत्ता समीकरण जरूर बदल गए. 
1. पहले प्रशांत किशोर जन सुराज अभियान चला रहे थे, अब बिहार नवनिर्माण यात्रा पर निकले हैं. जन सुराज अभियान ही बाद में राजनीतिक दल के रूप में कंवर्ट हो गया था. जन सुराज पार्टी – आखिर दोनों यात्राओं में किस तरह का फर्क होगा? 
2. लगातार तीन साल प्रशांत किशोर ने जो कैंपेन चलाया, उसका रिजल्ट तो वो बिहार चुनाव के नतीजों में देख ही चुके हैं. अब इतना जल्दी तो कुछ बदलने से रहा – सवाल ये है कि जन सुराज अभियान के दौरान बच्चों की शिक्षा और बेरोजगारी  को लेकर प्रशांत किशोर ने लोगों को जो कुछ बताकर जागरूक करने की कोशिश की, उससे अलग अब क्या बताएंगे?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के बगहा से अपनी नई यात्रा शुरू की है. बिहार नवनिर्माण यात्रा. नए सिरे से बिहार यात्रा शुरू करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज का मकसद बिहार में एक मजबूत, ईमानदार और जवाबदेह राजनीतिक विकल्प तैयार करना है, जिसके लिए संगठन लगातार गांव-गांव और जनता के बीच जाकर काम कर रहा है.
जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर का कहना है कि विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद भी जन सुराज ने अपने अभियान को कभी ढीला नहीं पड़ने दिया. बोले, बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत हर जिले में संगठनात्मक मजबूती पर फोकस किया जा रहा है. प्रशांत किशोर ने बताया कि नई यात्रा का मुख्य मकसद पुराने साथियों से मिलना, नए लोगों को जोड़ना और जमीनी स्तर पर संगठन के ढांचे को मजबूत बनाना है.
बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष को लेकर प्रशांत किशोर का कहना है, जनता ने NDA को सत्ता चलाने का आदेश दिया है, आरजेडी को विपक्ष की भूमिका दी है, और जन सुराज को समाज के बीच जाकर लोगों के मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है… हम वही कर रहे हैं, जो जनता ने हमें करने को कहा है.
क्या कर रहे हैं केजरीवाल आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अंग्रेजी दैनिक अखबार इंडियन एक्स्प्रेस से बातचीत में दावा किया है, आम आदमी पार्टी प्रमुख सिर्फ दिल्लीवालों की नजरों से दूर हुए थे, लेकिन असल में वह आत्ममंथन कर रहे थे… तभी ये अटकलें भी तेज हो गईं कि दिल्ली हारने के बाद अरविंद केजरीवाल पंजाब की कमान संभाल सकते हैं, या फिर राज्यसभा का रास्ता चुनेंगे. लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ… अरविंद केजरीवाल पूरी ताकत से काम में जुटे थे.
1. सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है, आम आदमी पार्टी अपनी तीन प्राथमिकताएं तय की है. और, बीते साल भर में उसी पर काम चल रहा है. ये प्राथमिकताए हैं – पंजाब को बनाए रखना, गोवा को जीतना और गुजरात के साथ साथ उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी का विस्तार करना.
2. दिल्ली की हार के बाद पंजाब को बचाए रखना आम आदमी पार्टी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी काम है. आप कार्यकर्ताओं का मानना है, पंजाब के बचे रहने से न सिर्फ AAP की राष्ट्रीय मौजूदगी सुरक्षित रहेगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश में भी विस्तार का रास्ता भी खुलेगा. गुजरात और उत्तर प्रदेश का नंबर उसके बाद आता है. 
3. दिल्ली की हार से सबक मिले हैं, और उसी दिशा में अरविंद केजरीवाल लौटने की कोशिश कर रहे हैं. तरीके पुराने ही हैं, लेकिन आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता भी वे ही होते हैं.
जून, 2025 में अरविंद केजरीवाल दिल्ली में सार्वजनिक तौर पर सड़क पर उतरे थे, जब वह झुग्गियों और अनऑथराइज्ड कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाए जाने के खिलाफ आम आदमी पार्टी के विरोध का नेतृत्व कर रहे थे. बाकी तो दिल्ली में उनके नुमाइंदे बनकर सौरभ भारद्वाज मोर्चा संभाल ही रहे हैं, जिनको जनकपुरी में बाइक सवार कमल ध्यानी को श्रद्धांजलि देने के लिए जाते वक्त दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था.

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