घर के 500 मीटर दूर ही हुआ ऐसा हादसा कि सेकंड में चली गई जान

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यूपी के प्रतापगढ़ में घर से महज 500 मीटर दूर निकले लाल बहादुर यादव की जिंदगी पलक झपकते खत्म हो गई. बाबूगंज बाजार में हाईमास्ट पोल लगाते समय क्रेन का पट्टा टूटा और 65 फीट ऊंचा ढांचा उनकी कार पर आ गिरा. कुछ सेकंड का हादसा परिवार की दुनिया उजाड़ गया, पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है.
यूपी के प्रतापगढ़ जिले में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया. घर से महज 500 मीटर की दूरी पर, रोज की तरह निकले एक शख्स की जिंदगी पलभर में खत्म हो गई. बाबूगंज बाजार में एक हाईमास्ट पोल अचानक क्रेन से छूटकर चलती कार पर गिर पड़ा. कार चला रहे ठेकेदार और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता लाल बहादुर यादव (48) की मौके पर ही मौत हो गई. घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है और अब यही फुटेज इस हादसे की भयावहता बयान कर रही है.
बाबूगंज बाजार में सामान्य चहल-पहल थी. दुकानें खुली थी और बाजार में लोग आ-जा रहे थे, यातायात भी सामान्य गति से चल रहा था. लोग खरीदारी में व्यस्त थे. पेट्रोल पंप के सामने भारत पेट्रोलियम की हाईमास्ट लाइट का करीब 65 फीट ऊंचा पोल क्रेन की मदद से खड़ा किया जा रहा था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पोल का वजन लगभग 40 कुंतल बताया जा रहा है. कामकाज चल ही रहा था कि अचानक तेज आवाज के साथ क्रेन का पट्टा टूट गया. उसी क्षण वहां से गुजर रही क्रेटा कार पर यह भारी पोल सीधा आ गिरा. कार के अगले हिस्से पर जैसे आसमान टूट पड़ा हो. आसपास खड़े लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले सब कुछ खत्म हो चुका था.
 प्रतापगढ़ शहर की ओर किसी निजी काम से निकले थे. उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि घर से कुछ ही कदम दूर मौत उनका इंतजार कर रही है. घटना स्थल उनके आवास से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है. चश्मदीदों के अनुसार, पोल गिरते ही जोरदार धमाका हुआ. आसपास मौजूद लोग घबरा गए. कुछ सेकंड के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया. जब लोगों ने कार की ओर दौड़ लगाई तो देखा कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था और चालक अंदर फंसा हुआ है.
स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए कार का दरवाजा तोड़ने की कोशिश की. कई लोगों ने मिलकर किसी तरह अंदर फंसे लाल बहादुर यादव को बाहर निकाला. उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं. यह खबर फैलते ही बाबूगंज बाजार और आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई. देखते ही देखते अस्पताल परिसर और घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई.
पेट्रोल पंप और आसपास लगे कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है. फुटेज में साफ दिखाई देता है कि किस तरह पोल खड़ा करते समय संतुलन बिगड़ा और भारी भरकम ढांचा सीधे सड़क की ओर झुक गया. क्रेन का पट्टा टूटते ही पोल तेजी से नीचे गिरा और गुजरती कार उसकी चपेट में आ गई. प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि पोल लगाने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं. प्राथमिक तौर पर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है.
लाल बहादुर यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय चेहरा थे. वह समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और अंतू नगर पंचायत से दो बार चुनाव मैदान में उतर चुके थे. हालांकि दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन क्षेत्र में उनकी पहचान एक सक्रिय कार्यकर्ता और ठेकेदार के रूप में थी. पेशे से वह लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकेदार थे. इसके अलावा उनके पास देशी शराब का ठेका भी था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह मिलनसार स्वभाव के थे और क्षेत्रीय कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाते थे.
पारिवारिक जानकारी के अनुसार, लाल बहादुर यादव तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे. उनके परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है. सबसे छोटे भाई सोनू यादव पेशे से वकील हैं, जबकि बीच के भाई मुन्ना यादव पारिवारिक जिम्मेदारियां संभालते हैं. घर के मुखिया के इस तरह अचानक चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. परिजन बार-बार यही कह रहे हैं कि सुबह तक सब कुछ सामान्य था, किसी ने सोचा भी नहीं था कि दोपहर इतनी भयावह साबित होगी.
हादसे के बाद बाबूगंज बाजार में कुछ समय के लिए दुकानें बंद कर दी गईं. लोग समूहों में खड़े होकर घटना की चर्चा करते रहे. कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब इतना भारी पोल लगाया जा रहा था, तो सड़क पर आवागमन क्यों नहीं रोका गया? क्या सुरक्षा घेरा बनाया गया था? क्या तकनीकी जांच पूरी तरह की गई थी? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएंगे. स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं. इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हाईमास्ट पोल जैसे भारी ढांचे को खड़ा करना तकनीकी और सुरक्षा दृष्टि से बेहद संवेदनशील काम होता है. क्रेन की स्थिति, पट्टे की मजबूती, कार्य क्षेत्र की घेराबंदी इन सबका विशेष ध्यान रखा जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा इस बात की भी याद दिलाता है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है. घर से निकलते वक्त किसी को अंदाजा नहीं होता कि रास्ते में क्या इंतजार कर रहा है. 500 मीटर की दूरी, जो रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ भी नहीं लगती, वही इस बार अंतिम सफर बन गई. सीसीटीवी में दर्ज वे कुछ सेकंड अब बार-बार देखे जा रहे हैं. क्रेन का हल्का सा झटका, पट्टे का टूटना, पोल का झुकना और फिर तेज धमाका. घटनाएं कभी-कभी इतनी तेजी से घटती हैं कि प्रतिक्रिया देने का भी समय नहीं मिलता.
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मौके का निरीक्षण किया है. तकनीकी टीम को बुलाकर उपकरणों की जांच कराई जा रही है. यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई संभव है.
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