रात में 6 थानों की पुलिस ने नहीं सुनी बात, सुबह मिली लाश

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दिल्ली की सड़कों पर एक युवक गड्ढे में गिरकर मर गया और उसके पिता पूरी रात बेटे को ढूंढते रहे.छह थानों के दरवाज़ खटखटाए गए, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई. सवाल पूछे गए, शक जताए गए, मदद नहीं मिली. सुबह जब पुलिस का फोन आया, तब कमल जिंदा नहीं था. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, सिस्टम की बेरुखी का आईना है.
दिल्ली की सड़कों पर सोमवार की रात एक युवक घर लौट रहा था. रोज की तरह, उसी रास्ते से, उसी समय पर. न कोई जल्दबाज़ी, न कोई बदला हुआ रूट, न कोई अनहोनी की आहट.लेकिन यह रात कमल के लिए आख़िरी साबित हुई और उसके परिवार के लिए एक ऐसा सवाल छोड़ गई, जिसका जवाब अब तक किसी थाने, किसी अफसर या किसी सिस्टम के पास नहीं है. 
कमल की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस पूरी रात की कहानी है, जब उसके घर वाले अपने बेटे को ढूंढते रहे, दोस्त सड़कों पर भटकते रहे और छह थानों के दरवाजों पर गुहार लगते रहे लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.
सातवें थाने में जाकर जो जवाब मिला, उसने परिजनों के जख्म पर नमक छिड़क दिया. तुम्हारा अकेला लड़का नहीं खोया है, ऐसे लड़के रोज खोते हैं. 
कमल, रोहिणी स्थित अपने दफ्तर में बैंक के कॉल सेंटर में काम करता था.पिछले तीन वर्षों से उसकी दिनचर्या एक जैसी थी. सुबह दफ्तर, रात को घर.दोस्त बताते हैं कि वह नशे से दूर रहने वाला, सीधा-सादा और जिम्मेदार युवक था.उसी भरोसे के साथ परिवार को कभी चिंता नहीं हुई कि वह देर करेगा या रास्ता बदल लेगा.सोमवार की रात करीब 11 बजकर 53 मिनट पर कमल की आख़िरी बातचीत घरवालों से हुई.उसने कहा कि  डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच गया हूं, ज़्यादा से ज़्यादा 15 मिनट में घर पहुंच जाऊंगा.लेकिन 15 मिनट बीते… फिर आधा घंटा.लेकिन कमल नहीं पहुंचा.फोन लगाया गया कोई जवाब नहीं आया.एक बार… दो बार… दस बार.यहीं से वह बेचैनी शुरू हुई, जो पूरी रात डर, गुस्से और बेबसी में बदलती चली गई. 

पहले खुद तलाश, फिर थानों की चौखट, 

परिजन और दोस्त बिना देर किए घर से निकल पड़े.संभावित रास्ते, चौराहे, पार्क, अंधे मोड़.जहां-जहां कमल हो सकता था, वहां-वहां खोजबीन हुई.लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला.रात के अंधेरे में अगला ठिकाना था पुलिस थाना.सबसे पहले जनकपुरी थाना.परिजनों का आरोप है कि वहां गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराने से मना कर दिया गया.जवाब मिला 24 घंटे पूरे होने दो, तब शिकायत लिखी जाएगी.परिवार का कहना है कि उन्होंने हाथ जोड़कर पुलिस से कहा कि कम से कम मोबाइल की लोकेशन ही ट्रैक कर दी जाए, क्योंकि फोन अभी चालू है.आरोप है कि पुलिस ने लोकेशन निकाली भी, लेकिन वह लोकेशन तुरंत डिलीट हो गई.जब दोबारा पूछा गया, तो कहा गया लोकेशन गोपनीय है, नहीं दे सकते.सिर्फ इतना बताया गया कि फोन करीब 200 मीटर के दायरे में है, किसी पार्क के आसपास. 

छह थाने, एक रात… कोई FIR नहीं

इसके बाद शुरू हुआ वह सिलसिला, जो परिजनों के मुताबिक पूरी रात चलता रहा.जनकपुरी, विकासपुरी, रोहिणी, रोहिणी सेक्टर-10, डी-ब्लॉक, डाबड़ी… हर थाने में वही सवाल, वही गुहार, वही जवाब.  कहीं कहा गया रात हो गई है, सुबह देखेंगे.कहीं पूछा गया लड़का नशा करके तो नहीं आया था?  परिवार का कहना है कि यह सवाल उनके लिए सबसे ज़्यादा तकलीफदेह था. उनका दावा है हमारा बेटा नशा छूता भी नहीं था.फिर भी शक उसी पर किया गया.

ऐसे तो रोज लड़के गायब होते हैं

सबसे तीखा आरोप सागरपुर थाने को लेकर लगाया जा रहा है.परिजनों का कहना है कि वहां उन्हें साफ-साफ कह दिया गया तुम्हारा अकेला लड़का नहीं खोया है, ऐसे तो रोज लड़के गायब होते हैं.परिवार का कहना है कि पुलिस ने सिर्फ नाम, बाइक नंबर, मोबाइल नंबर और फोटो लेकर उसे व्हाट्सएप ग्रुप में डालने की बात कही.

सुबह की कॉल… और खुला गड्ढा

पूरी रात तलाश के बाद, थके-हारे परिजन सुबह घर लौट ही रहे थे कि अचानक फोन आया.बताया गया कि  आपके लड़के का एक्सीडेंट हो गया है, मौके पर आ जाइए।सुबह करीब 7:30 बजे, परिजन मौके पर पहुंचे.वहां जो दृश्य था, उसने सबको तोड़ दिया.कमल अपनी बाइक के साथ एक खुले, बिना बैरिकेडिंग वाले गड्ढे में पड़ा मिला.स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढा काफी समय से खुला था.

हादसा या साजिश? परिवार को शक

परिवार इस मौत को सिर्फ हादसा मानने को तैयार नहीं है.उनका कहना है क्या कोई समझदार इंसान खुद लौटकर गड्ढे में गिर जाएगा? अगर रास्ता बंद था, तो उसे ठीक से क्यों नहीं रोका गया? परिजनों ने यह आशंका भी जताई है कि हो सकता है कमल की हत्या कर शव को गड्ढे में फेंक दिया गया हो.उनका तर्क है कि जिस जगह मोबाइल लोकेशन बताई गई थी, वही जगह बाद में हादसे की निकली. 
परिवार और स्थानीय लोग इस हादसे के लिए जल बोर्ड और संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.सवाल उठ रहे हैं कि अगर सड़क खोदी गई थी, तो बैरिकेड क्यों नहीं थे? चेतावनी बोर्ड कहां थे? रात में काम चल रहा था तो सुरक्षा कर्मी क्यों नहीं थे.लोगों का कहना है कि दिल्ली में इस तरह के खुले गड्ढे अब आम हो चुके हैं, और हर बार जान जाने के बाद ही जिम्मेदारी तय होती है. 

दिल्ली पुलिस का पक्ष

वहीं दिल्ली पुलिस अपने बचाव में कहती है कि उन्होंने परिवार की हर संभव मदद की.पुलिस के मुताबिक  12:30 बजे परिवार विकासपुरी थाने पहुंचा, जहां फोटो लेकर एक्सीडेंट और MLC कॉल चेक की गई.2:30 बजे परिवार जनकपुरी थाने पहुंचा, जहां एक सब-इंस्पेक्टर ने मोबाइल टावर लोकेशन निकाली, जो घटना स्थल से करीब 200 मीटर दूर थी.पुलिस ने आसपास करीब 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया.जिला स्तर के व्हाट्सएप ग्रुप में फोटो शेयर कर जानकारी फैलाई गई.सुबह 8:03 बजे एक नागरिक ने PCR कॉल कर गड्ढे में व्यक्ति और बाइक होने की सूचना दी.पुलिस 3 मिनट में मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को बुलाकर 8:30 बजे शव बाहर निकाला गया.पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं को देखा जा रहा है. 
दिल्ली जल बोर्ड ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि जनकपुरी में DJB की पाइपलाइन पुनर्वास परियोजना (Pipeline Rehabilitation Site) के दौरान हुई दुखद दुर्घटना पर दिल्ली जल बोर्ड गहरा शोक व्यक्त करता है और शोकाकुल परिवार के साथ संवेदना प्रकट करता है.घटना की जांच हेतु समिति गठित की गई है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.सभी कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच जारी है.  नागरिकों से अनुरोध है कि किसी भी असुरक्षित कार्यस्थल की सूचना टोल-फ्री नंबर 1916 पर दें.

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