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मोदी सरकार ने संसद में चर्चा के दौरान क्यों अधिसूचना जारी की है?बिहार में कब होंगे पंचायत चुनाव? पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कर दीUGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, केंद्र सरकार को देना हैIran खामेनेई के बाद लारिजानी खत्म मारकर भी मुश्किल में पड़ सकता है अमेरिका,Iran के साथ जंग में अकेले पड़े Trump NATO देश बोले ये हमारी लड़ाई नहीं,Bihar में राज्यसभा चुनाव हारने वाले RJD कैंडिडेट AD Singh का बड़ा बयान,पांच बच्चों के पिता हैं Anant Singh, मोकामा में कौन होगा का सियासी वारिसBihar का नया CM तय? सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते हुए बोले नीतीश कुमारबिहार का एक और एयरपोर्ट होगा अपग्रेड, 15 महीने में बनकर तैयार Hindi newsGas Supply कहीं ऑनलाइन बुकिंग में दिक्कत तो कहीं लगी लंबी लाइन gas cylinder news

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संसद में एक तरफ नारी शक्ति कानून में संशोधन विधेयक पर बहस चल रही है और दूसरी तरफ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 को लागू करने की तारीख घोषित कर दी गई है. ऐसे में सवाल उठता है

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को लेकर संसद में बहस जारी है. लोकसभा में शुक्रवार शाम चार बजे ‘संशोधन विधेयक’ पर वोटिंग होनी है. संसद में बहस के बीच सरकार ने देर रात अहम फैसला लिया. लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 को गुरुवार से लागू कर दिया है.  
केंद्रीय कानून मंत्रालय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 16 अप्रैल से लागू करने की नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना जारी कर दी है. इसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है. हालांकि, यह नहीं पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया. 
सरकार द्वारा जारी यह नोटिफिकेशन पहली नजर में भ्रम पैदा कर सकता है, क्योंकि एक तरफ संसद में इस कानून में संशोधन विधेयक पर बहस चल रही है और दूसरी तरफ नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 को लागू करने की तारीख घोषित कर दी गई है.  आखिर इसके सियासी मायने क्या हैं और अधिसूचना जारी होने के बाद संसोधन विधेयक का क्या होगा?  

महिला आरक्षण की अधिसूचना जारी

मोदी सरकार ने गुरुवार से 2023 का नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम देशभर में लागू कर दिया. सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इस पर संसद में बहस जारी है. इस अधिनियम में बदलाव के लिए कल यानी गुरुवार को ही लोकसभा में संशोधन विधेयक आया. संसद में विधेयक पर चर्चा के बीच मोदी सरकार ने 2023 में पास महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना जार कर दी है.  
केंद्रीय कानून मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार 16 अप्रैल 2026 से अधिनियम के प्रावधान लागू करती है. 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वारा इस कानून की मंजूरी दी गई थी, इसमें कहा गया था कि ये उस तारीख को लागू होगा, जब सरकार अपने आधिकारिक गजट में अधिसूचित करेगी.  

मोदी सरकार की सोची-समझी चाल

सरकार ने तीन संशोधन बिल लाई है

नारी शक्ति अधिनियम 2023 के तहत महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण 2027 की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलना था. ऐसे में मोदी सरकार 2029 के चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति अधिनियम 2023 को संशोधन करने का रास्ता चुना. इसके तहत ही संसद का का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें सरकार ने एक साथ तीन विधेयक पेश किए हैं. 
लोकसभा में मोदी सरकार ने एक विधेयक केंद्र शासित प्रदेश में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए पेश किया. दूसरा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, जिसमें जनसंख्या की नई परिभाषा और संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का है. तीसरा परिसीमन विधेयक 2026लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. सरकार ने इन तीनों विधेयक को रूल 66 के तहत लाने का काम किया है. इसका सीधा मतलब है क‍ि अब महिला आरक्षण, परिसीमन और यूनियन टेरिटरी से जुड़े बिल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही ‘महा-प्रस्ताव’ है. 

सरकार के लिए अधिसूचना मजबूरी बना

नंबर गेम जुटाना एनडीए के लिए टेढ़ी खीर

 लोकसभा में 540 सांसद हैं, जिसमें तीन सीटें खाली हैं. ऐसे में सरकार को इस संशोधन बिल को पास करने के लिए ज़रूरी संख्या 360 चाहिए. NDA की अपनी ताकत 293 है,जो ज़रूरी संख्या से 67 कम है. वोटिंग से दूर रहने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ने पर ज़रूरी संख्या कम हो सकती है, लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए ऐसे सदस्यों की संख्या बहुत ज़्यादा होनी चाहिए.  
Bihar News in Hindi: नीतीश सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा बिहार में पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे. साथ ही कहा कि बिहार का नेतृत्व नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगा.
नीतीश सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने शनिवार (21 मार्च) को यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार में पंचायत चुनाव तय समय पर ही होंगे और परिसीमन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रमुख और उप-प्रमुख के चुनाव पहले की तरह ही मौजूदा व्यवस्था के तहत होंगे.
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी बताया कि वर्ष 2026 के पंचायत चुनावों के लिए नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा. जिससे समाज के सभी वर्गों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके. गया में आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है और अब इसे और संतुलित बनाने की जरूरत है.

मंत्री ने पंचायत सरकार भवन का किया निरीक्षण

जानकारी के अनुसार, अपने गया दौरे के दौरान दीपक प्रकाश ने टंकुप्पा ब्लॉक के बरसाउना गांव में एक विवादित पंचायत सरकार भवन के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया. यह निर्माण कार्य स्थानीय विरोध के कारण रुका हुआ था. मंत्री ने अधिकारियों के साथ जमीन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कर तेजी लाने के निर्देश दिए.

Bihar panchayati Raj chunav kab hoga 

Bihar panchayat election 2026

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नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगी बिहार का नेतृत्व- मंत्री

गया के सर्किट हाउस में राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हुए मंत्री दीपक प्रकाश कहा कि राज्य में नेतृत्व को लेकर जो अटकलें चल रही हैं, उन पर सही समय पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. उन्होंने दोहराया कि बिहार का नेतृत्व नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगा और राज्य के विकास का श्रेय उनके सुशासन को जाता है.
ईद के मौके पर पटना के गांधी मैदान में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार सरकारी कार्यों में व्यस्त थे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निशांत कुमार की मौजूदगी को किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होने जा रही है। इससे पहले 29 जनवरी को शीर्ष न्यायालय ने नियमों (Equity Regulations 2026) पर रोक लगा दी थी। अदालत ने सरकार और यूजीसी को इन याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब देने के लिए कहा था।
याचिकाओं में आपत्ति उठाई गई थी कि इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ होने वाले भेदभाव तक ही सीमित रूप में बताया गया है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नोटिस जारी कीजिए, जिसका जवाब 19 मार्च तक दिया जाना है। सॉलिसिटर जनरल नोटिस स्वीकार करें।

CJI ने उठाई थी आपत्ति

पिछली सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ‘यदि हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे, समाज में विभाजन होगा और इसके गंभीर प्रभाव होंगे… प्रथम दृष्टया हम कहते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने के लिए जांच करने की आवश्यकता है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।’

2012 के नियमों को किया था बहाल

पीठ ने नियम 3(1)(सी) के तहत संस्थागत संरक्षण से सामान्य श्रेणियों को बाहर रखने वाली जाति-आधारित भेदभाव की ‘गैर-समावेशी’ परिभाषा को स्थगित करने का निर्देश दिया और यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2012 को बहाल कर दिया। पीठ ने आदेश दिया था कि 2012 के नियम अगले आदेश तक लागू रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी एक्सपर्ट्स पैनल की सलाह

सीजेआई ने सलाह दी थी कि इसपर एक्सपर्ट्स कमेटी की तरफ से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘एक समिति का गठन होना चाहिए, जिसमें दो या तीन ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति हों, जो सामाजिक मूल्यों और समाज की समस्याओं को समझते हों। समाज का विकास कैसे होना चाहिए और यदि हम ऐसा ढांचा तैयार करते हैं तो परिसर के बाहर लोग कैसा व्यवहार करेंगे। इस विषय पर उन्हें गंभीरता से विचार करना चाहिए।’

जमकर हुए थे प्रदर्शन

इन नियमों के आने के बाद से ही देशभर के कई संस्थानों में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा कई सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए थे। इधर, गुरुवार की सुनवाई से पहले भी प्रदर्शनों की खबरें सामने आईं थीं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA), भीम आर्मी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी (AIFE) के बैनर तले डाकबंगला चौराहा पर एकत्र हुए और पटना में हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातु्ल्ला अली खामेनेई के बाद अब इजराइल ने अली लारिजानी की हत्या कर दी है. इसे इजराइल और अमेरिका ने युद्ध की बड़ी उपलब्धि बताया है, लेकिन अमेरिका के लिए यह बैकफायर कर सकता है. क्यों, आइए इसे विस्तार से जानते हैं. #peparnews
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के 17 दिन बाद इजराइल ने सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी को भी मार गिराया है. इजराइल डिफेंस फोर्स ने खुफिया जानकारी के आधार पर लारिजानी की उनकी बेटी के घर पर एयरस्ट्राइक के जरिए हत्या कर दी. लारिजानी को ईरान का दूसरा सबसे पावरफुल लीडर माना जाता था. वे खामेनेई के काफी करीबी थे, जो सैन्य समन्वय का काम देख रहे थे.
खामेनेई के बाद लारिजानी की हत्या को इजराइल अपनी उपलब्धि बता रहा है. खुद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या सच में इसका नुकसान ईरान को होगा? या बड़े नेताओं की हत्या से ईरान को फायदा हो सकता है.

अब तक ईरान के इन बड़े नेताओं की हत्या की गई

इजराइल और अमेरिका ने युद्ध के पहले ही दिन ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई, आईआरजीसी प्रमुख मोहम्मद पाकपुर, रक्षा सलाहकार अली शमखानी, सैन्य प्रमुख अब्दुल मोसावी की हत्या कर दी. इसके अलावा स्ट्राइक में खामेनेई के सैन्य सचिव मोहम्मद शिराजी और सैन्य खुफिया प्रमुख सालेह असादी भी मारे जा चुके हैं.
इसके अलावा जंग के दौरान ईरान के अब तक 2 रक्षा मंत्री अजीज नासिरज़ादेह और माजिद इब्न अल-रेज़ा की हत्या की जा चुकी है. अब इजराइल ने अली लारिजानी की हत्या कर दी. लारिजानी सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के सचिव थे.

ईरान को झटका, यूएस-इजराइल को नुकसान क्यों?

शीर्ष नेताओं की हत्या ईरान के लिए झटका जरूरी है, लेकिन इससे अमेरिका और इजराइल को कोई बड़ा लाभ होता नहीं दिख रहा है. कुल मिलाकर बड़े नेताओं की हत्या ईरान की इस्लामिक गणराज्य की सरकार के लिए आखिर में फायदेमंद साबित हो सकता है. कैसे, आइए इसे 4 पॉइंट्स में समझते हैं…

ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है।
ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं।
हालांकि इन देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।

जर्मनी बोला- यह यूरोप की जंग नहीं

Germany
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी ने साफ कहा है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले में कभी कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जर्मनी के सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन बमबारी करके उसे झुकाना सही तरीका नहीं है।
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना खुद इतनी ताकतवर है, तो कुछ यूरोपीय जहाज क्या कर लेंगे।

ब्रिटेन बोला- हम इस युद्ध में नहीं फंसेंगे

यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीति पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत अहम है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो फिलहाल ईरान के कारण प्रभावित हो रही है।

इटली बोला- जंग नहीं बातचीत से हल निकले

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए और उनका देश किसी नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता।
दूसरी ओर, ट्रम्प लगातार अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस समुद्री रास्ते से फायदा होता है, उन्हें इसकी सुरक्षा में हिस्सा लेना चाहिए। ट्रम्प ने खासतौर पर ब्रिटेन से नाराजगी भी जताई, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि वह इसमें शामिल होगा।
यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने रेड सी (लाल सागर) मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से इनकार कर दिया। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई इच्छा नजर नहीं आती।
यूरोपीय देश अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें समझना है कि ट्रम्प की रणनीति क्या है और आगे की योजना क्या होगी।

इजराइल बोला- 3 सप्ताह के लिए जंग की प्लानिंग तैयार

इस बीच इजराइल ने ईरान के कई शहरों जैसे तेहरान, शिराज और तबरीज में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक विमान भी नष्ट कर दिया।
इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के साथ अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए उनकी प्लानिंग तैयार है। सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोमवार को कहा है कि सेना ने इससे आगे के समय के लिए भी अलग योजनाएं बना रखी है।
इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है। वे ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना चाहते हैं जिनसे वह इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसके तहत ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है।
इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के अंदर अब भी हजारों ऐसे ठिकाने हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान में अब “लगभग कुछ भी निशाना बनाने के लिए नहीं बचा है।”

ईरान बोला- अमेरिकी सेना आई तो अंजाम भुगतना होगा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध खत्म होगा तो इस तरह खत्म होना चाहिए कि दुश्मन दोबारा हमला करने की हिम्मत न करे।
अमेरिका ने बताया कि इस युद्ध में उसके करीब 200 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक हैं।

लेबनान में जमीनी हमले कर रहा इजराइल

इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है, जहां हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस संघर्ष में लेबनान में अब तक 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं।
जर्मनी ने इजराइल को चेतावनी दी है कि लेबनान में जमीनी हमला करना गलती होगी और इससे वहां की मानवीय स्थिति और खराब हो जाएगी।
अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है।
एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है।
यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है।
वहीं, तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द जंग खत्म कर सकता है। हालांकि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में बने रहते हैं तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालना आसान नहीं होगा।

राज्यसभा चुनाव में आरजेडी प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) की हार हो गई है. सोमवार (16 मार्च, 2026) को हुए मतदान में उन्हें केवल 37 वोट मिले. जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत थी लेकिन चार विधायकों ने वोट ही नहीं दिया. इनमें कांग्रेस के तीन और एक आरजेडी के हैं. इस हार के बाद अमरेंद्र धारी सिंह ने बड़ा बयान दिया है. #peparnews 
रिजल्ट के बाद मीडिया से बातचीत में एडी सिंह ने कहा, “बड़ी सिंपल बात है… हम जीतकर हार गए हैं. हमारे पास नंबर था. हॉर्स ट्रेडिंग हुई है. चार मतदाता नहीं रहे हैं. वो हमारे गठबंधन के थे… वो जहां भी चले गए.. इसलिए जीत नहीं पाए.” एक सवाल पर कहा कि जब सारे कैंडिडेट ने वोट दे दिया है तो हम क्या प्रोटेस्ट करेंगे?

यह शुरू से ही साफ था एनडीए बड़े अंतर से जीतेगा’

राज्यसभा चुनाव पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा, “यह शुरू से ही साफ था कि एनडीए बड़े अंतर से जीतेगा. हमारे नेता, हमारे मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार, अब राज्यसभा जा रहे हैं. मैं एनडीएके सभी पांच सदस्यों को जीत की बधाई देता हूं और खासकर नीतीश कुमार को, जो राज्यसभा जा रहे हैं.
नीतीश कुमार को लेकर उन्होंने आगे कहा, “उनके पास बहुत ज्यादा विधायी अनुभव है. जब वे वहां जाएंगे, तो बिहार के मुद्दे जरूर उठाएंगे. बिहार में जो सरकार बनेगी, उसे नीतीश कुमार गाइड करेंगे. जब हाउस सेशन में होगा, तो वे दिल्ली में रहेंगे और नहीं तो, वे पार्टी के लिए काम करने के लिए पटना में रहेंगे और जरूरत के हिसाब से सरकार को गाइड करते रहेंगे.” #peparnews 
आरएलएम प्रमुख और एनडीए से राज्यसभा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “इस जीत के लिए सभी मतदाताओं का हम आभार व्यक्त करते हैं. यह हमारे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत एनडीए के सभी कार्यकर्ताओं की जीत है. बिहार के हितों के लिए हम हमेशा आवाज उठाते रहेंगे.”

मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बड़ा ऐलान किया है कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनकी जगह बड़े बेटे अंकित सिंह चुनावी मैदान में उतरेंगे. अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के सीएम न रहने पर विधायकी छोड़ने की बात भी कही. अंकित सिंह ने इंग्लैंड से पढ़ाई की है और अब उन्हें मोकामा के विकास कार्यों की जिम्मेदारी देकर सियासी तैयारी कराई जा रही है, ताकि वे अपना जनाधार बना सकें. #peparnews 
बिहार विधानसभा में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को विधायकों के द्वारा मतदान किया जाना था. एनडीए और महागठबंधन, दोनों के ही सारे विधायकों को इसके लिए अनिवार्य रूप से अपना वोट डालना था. इसी क्रम में जदयू से मोकामा के विधायक अनंत सिंह भी अपना वोट डालने के लिए विधानसभा में पहुंचे हुए थे. अपने वोट डालने के दौरान ही अनंत सिंह ने कुछ ऐसा कह दिया, जो देखते ही देखते सुर्खी बनने लगी. दरअसल, अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के सीएम नहीं रहने पर अपनी विधायकी को भी खत्म करने की बात कही, साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि अब उनकी अगली पीढ़ी चाहे तो चुनाव लड़ सकती है.

बेटा होगा चुनावी मैदान में

दरअसल, वोटिंग के दौरान एक सवाल के जवाब में अनंत सिंह ने कहा कि वह अब अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि अब उनका बड़ा बेटा चुनावी मैदान में होगा. बता दें कि अनंत सिंह न केवल मोकामा से विधायक रह चुके हैं, बल्कि उनकी पत्नी नीलम देवी भी मोकामा से विधायक रह चुकी हैं. बिहार की राजनीति में चलने वाली चर्चा पर यकीन करें तो अनंत सिंह की मोकामा में तूती बोलती है. अनंत सिंह के खड़ा होने का मतलब उनकी जीत तय मानी जाती है.

पांच बच्चों के पिता हैं अनंत सिंह

अनंत सिंह के पांच बच्चे हैं, जिनमें उनकी बेटी सबसे बड़ी है. बेटी की शादी अनंत सिंह बहुत पहले ही कर चुके हैं. इसके बाद एक और बेटी है. उनके बेटे जुडवां हैं. इनमें बड़े बेटे का नाम अंकित है, जबकि छोटे का नाम अभिषेक है. इसके अलावा उनका एक और बेटा अभिनव है. जिसकी उम्र करीब 16 साल है. उनके जुड़वे बेटे में अंकित बड़ा है. अभिषेक के जन्म से महज कुछ सेकंड पहले अंकित का जन्म हुआ था. बड़ी बेटी का नाम राजनंदनी है. वहीं छोटी बेटी को लोग प्यार से आज भी छोटी बुलाते हैं. वही बेटे में सबसे बड़ा अंकित तो सबसे छोटा अभिनव है.

इंग्लैंड से की पढ़ाई

जानकार बताते हैं कि इन दोनों की ही प्रारंभिक पढाई एक साथ एक जैसी हुई है. इनका जन्म 14 मार्च 1999 में हुआ था. अंकित और अभिषेक दोनों ने ही नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. फिलहाल दोनों भाई इंगलैंड से अपनी आगे की स्टडी को पूरा कर रहे हैं. #peparnews 

कर रहे हैं चुनाव लड़ाने की तैयारी

अनंत सिंह से जुड़े लोगों की माने तो अपने बेटे को चुनावी मैदान में उतारने को लेकर अनंत सिंह अपनी तैयारी भी कर रहे हैं. विधायक फंड से मिलने वाली राशि से होने वाले विकास कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी अनंत सिंह अपने बेटे के जिम्मे दे चुके हैं. उनकी कोशिश बेटे को अपना खुद का जनाधार बनाने और अपनी जमीनी पकड़ को मजबूत करने को लेकर है.

Bihar News In Hindi समृद्धि यात्रा के दौरान पूर्णिया और कटिहार में सीएम नीतीश कुमार ने बिहार के विकास का रोडमैप रखा. हर प्रखंड में आदर्श स्कूल, डिग्री कॉलेज, बेहतर अस्पताल की योजना बताई. #peparnews 
बिहार में विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों का बड़ा खाका तैयार कर लिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मदद से बदली व्यवस्था के बाद अब बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा.  
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के दौरान गुरुवार (12 मार्च) को पूर्णिया और कटिहार पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों को संबोधित किया. इस दौरान राज्य के विकास को लेकर अगले 5 वर्षों की योजनाओं की जानकारी दी गई.

हर प्रखंड में खुलेंगे आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज

शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की योजना है. राज्य के प्रत्येक प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है. इससे ग्रामीण इलाकों के छात्रों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा और उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने की जरूरत कम होगी.

अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है. इसके साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने का काम भी किया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी.
राजधानी पटना में आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है. इसके माध्यम से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है, जिससे खेलों को बढ़ावा मिल सके.
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि राज्य को केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है. मखाना किसानों के लिए भी विशेष योजनाओं पर काम किया जाएगा ताकि उनकी आय बढ़ाई जा सके. #peparnews 

सभा में भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह

कटिहार में आयोजित सभा के दौरान मंत्री लेशी सिंह अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं. कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे.

बिहार के सुपौल जिले के बीरपुर एयरपोर्ट को अपग्रेड करने के लिए 36.38 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है. इससे कोसी क्षेत्र और नेपाल सीमा तक हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इस काम को पूरा करने की समय सीमा 15 महीने तय की गई है.
बिहार लगातार हवाई क्षेत्र की ओर अग्रसर हैं. दरभंगा और पूर्णिया के बाद सुपौल से भी जल्द हवाई जहाज उड़ान भरेगा. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सुपौल जिला के बीरपुर एयरपोर्ट के विकास और अपग्रेड के लिए टेंडर जारी किया है. कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के लिए प्रीफैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर टर्मिनल भवन, प्री-इंजीनियर्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर, प्री-इंजीनियर्ड फायर स्टेशन और एयरपोर्ट से जुड़े अन्य भवनों का निर्माण किया जाएगा.
परियोजना की अनुमानित लागत 36.38 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है और इसे पूरा करने के लिए 15 माह की समयावधि तय की गई है. इस परियोजना का उद्देश्य बीरपुर एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाना है. बीरपुर एयरपोर्ट निर्माण से मधुबनी, मधेपुरा, सहरसा, अररिया समेत सीमावर्ती देश नेपाल और आसपास के क्षेत्रों में हवाई सेवा को विस्तार मिलेगा.

बीरपुर एयरपोर्ट होगा अपग्रेड

उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य में हवाई संपर्क और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए एनडीए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. हाल ही में मुजफ्फरपुर में निर्माणाधीन हवाई अड्डे के रनवे निर्माण के लिए 43 करोड़ 13 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है. इसके साथ ही एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वाल्मीकि नगर एयरपोर्ट के विकास और अपग्रेड के लिए भी 38.64 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है और अब बीरपुर एयरपोर्ट के विकास और अपग्रेड के लिए 36.38 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है.

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने क्या कहा?

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सहरसा एयरपोर्ट निर्माण के लिए भी लगातार प्रयासरत है. जल्द ही यहां भी एयरपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्य सरकार निर्माणाधीन एयरपोर्ट की बारीकी से निगरानी भी कर रही, ताकि गुणवत्ता पूर्ण और तय समय में कार्य पूरा किया जा सके. सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सतत प्रयासों से तेजी से हो रहे एयरपोर्ट निर्माण से जहां बिहार में हवाई संपर्क को नई मजबूती मिलेगी वहीं पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

नेपाल को भी मिलेगा फायदा

बता दे कि पूर्णिया में एयरपोर्ट के निर्माण से कोसी-सीमांचल वासियों को काफी फायदा हो रहा है. यहां से दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, हैदराबाद के लिए नियमित उड़ान हैं. जिसका फायदा पड़ोसी देश नेपाल के लोग भी उठाते हैं. वहीं पूर्णिया से 120 किमी दूर बीरपुर में एयरपोर्ट निर्माण होने से कोसी के लोगों को फायदा होगा. उन्हें या तो पूर्णिया या फिर 65 किमी दूर दरभंगा जाकर हवाई सफर करना पड़ता हैं. बता दे कि नेपाल से बीरपुर की दूरी महज 60 किमी है. यह एयरपोर्ट आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी फायदेमंद साबित होगा.

गैस सप्लाई को लेकर ऐसा है देश में हाल मुंबई के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर और गैस एजेंसियां अब सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए ही एलपीजी सिलेंडर दे रही हैं. मुंबई के होटल और रेस्टोरेंट्स को 6 मार्च से एलपीजी की सप्लाई कम कर दी गई है अब होटल और रेस्टोरेंट्स को सप्लाई होने वाला एलपीजी 80 फीसदी तक बंद हो चुका है.
मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी जंग और गैस सप्लाई के बाधित होने के बाद देश में एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल को लेकर दिक्कतें होने लगी हैं. देश के कई शहरों पर इसका असर भी पड़ने लगा है. दिल्ली में सिलेंडर गैस बुक नहीं हो पा रहे तो मुंबई में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अब मुंबई में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद लोगों ने खाना बनाने के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों की ओर रूख करना शुरू कर दिया है. बाजार में इलेक्ट्रिक कुकर, माइक्रोवेव ओवन, ओटीजी ओवन, टोस्टर, ग्रिल, इलेक्ट्रिक तवा, एयर फ्रायर, मल्टी कुकर, इलेक्ट्रिक स्टीमर और हॉट प्लेट जैसे उपकरणों की खरीद में लगातार तेजी देखी जा रही है.
पिछले हफ्ते 7 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद स्थिति और बदली है. साथ ही व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक कराने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. महाराष्ट्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार में भी गैस सिलेंडर को लेकर लंबी-लंबी लाइन देखी जा रही है.

दिल्ली में गैस की बुकिंग तक नहीं हो पा रही

राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर में कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लोगों की ना तो गैस बुक हो पा रही है, और ना ही उन्हें सिलेंडर मिल पा रहा है. सरकार ने कई अलग-अलग टोल फ्री नंबर गैस बुक करने के लिए जारी कर रखे हैं, लेकिन वह नंबर भी अब ठीक से काम नहीं कर रहे हैं.
ऐसा ही एक नंबर 7718955555 है. जब इस नंबर पर रियलिटी चेक करने के लिए फोन किया गया तो कभी इस पर कॉल नहीं जाती, कभी नंबर स्विच ऑफ बताता है तो कभी नंबर नॉट इन यूज बताता है. उपभोक्ता अपनी गैस बुक करने के लिए ऑनलाइन इस नंबर को डायल करते हैं, उनकी गैस भी बुक नहीं हो पा रही जिसकी वजह से वह गैस एजेंसी की तरफ रुख कर रहे हैं. गैस बुक करने के लिए ज्यादातर गैस एजेंसी के बाहर लंबी-लंबी लाइन देखी जा रही है.

वैकल्पिक साधन तलाश रहे मुंबई के लोग

मुंबई में कई जगहों पर ग्राहकों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में लोग सतर्क रुख अपनाते हुए खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश कर रहे हैं और बिजली से चलने वाले रसोई उपकरणों की मांग बढ़ती जा रही है. कई व्यापारियों का कहना है कि यदि अगले एक हफ्ते में स्थिति में सुधार नहीं हुई, तो देश में ईंधन की कमी की आशंका बढ़ सकती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को देखते हुए ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके कारण आने वाले दिनों में बिजली से चलने वाले रसोई उपकरणों की मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
दूसरी ओर, मुंबई के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर और गैस एजेंसियां अब सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए ही एलपीजी सिलेंडर दे रही हैं. मुंबई के होटल और रेस्टोरेंट्स को 6 मार्च से एलपीजी की सप्लाई कम कर दी गई है अब होटल और रेस्टोरेंट्स को सप्लाई होने वाला एलपीजी 80 फीसदी तक बंद हो चुका है. एलपीजी गैस की कमी का असर अब मुंबई के पुराने और मशहूर होटलों पर भी दिखाई देने लगा है. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बाहर फोर्ट इलाके में स्थित करीब 178 साल पुराना पंचम पुरीवाला होटल भी इस संकट से जूझ रहा है.
ब्रिटिश काल में 1848 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक होटल में आमतौर पर 79 तरह के मेनू आइटम मिलते थे, और खास तौर पर यहां 5 तरह की पूरियां परोसी जाती थीं, लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब होटल में सिर्फ दो ही आइटम (पूरी-भाजी और आमरस-पूरी) ही उपलब्ध हैं. होटल प्रबंधन के मुताबिक उनके पास एलपीजी का बहुत ही सीमित स्टॉक बचा है. इसी कारण उन्हें कई परिचितों से उधार सिलेंडर लेकर किसी तरह होटल चलाना पड़ रहा है.

गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहींः MGL

हालांकि महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने साफ किया कि वर्तमान में गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है और कंपनी अपने परिचालन क्षेत्रों में कॉम्प्रेस्ड प्राकृतिक गैस (CNG) और पाइप के जरिये घरों में जाने वाली रसोई गैस (PNG) की सामान्य आपूर्ति बनाए हुए है. कंपनी ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष से एलएनजी आयात बाधित होने के कारण एमजीएल को गैस की आपूर्ति में कटौती होने की स्थिति में औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए गैस सप्लाई कुछ हद तक प्रभावित हो सकती है.
कई पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़ दिखने लगी है. पेट्रोल भराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ दिख रही है.

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